करोना, फिर तुम मत रोना।

सावधान!
कहीं हमारे हाथ में तो नहीं है मौत का सामान
चारो ओर करोना ही चल रहा है
मानव घर से बाहर नहीं निकल रहा है
देश की सिमाओं को तोड़कर
मरते हुए लोगों को अकेला छोड़कर
बढ़ रहा है आगे
आदमी भागे तो कहां भागे
एक जीव ने जीवधारियों को निशाना बनाया है
भूमि की रुह कांपी,आज आकाश भी थर्राया है
जान लेने पर उतारू एक विषाणु
युद्ध, मिशाइल,तोप खामोश,बंद है परमाणु
न दिखने वाले का अजब साया है
हर तरफ मौत का मातम ही छाया है
मारी, बिमारी, महामारी
आगे क्या होगा हे सुदर्शन चक्रधारी!
शहर के शहर अब कितने विरान हो गये
जीते-जागते लोग जैसे श्मसान में सो गये
आतंकवाद भी आतंक के घर में है
हर एक चीज करोना की नज़र में है
विध्वंस का तांडव है जारी
पता नही कब आ जाये हमारी बारी
करोना के साथ अगर कोई चीज सटी
तो समझिए सावधानी हटी दुर्घटना घटी
ये वाइरस नहीं देखता अपना और पराया
जो सामने आया उसको सबसे पहले निपटाया
खबरदार
अभी भी तो नहीं सो रहे हैं सरकार
अब आंखें खोलिए
बहुत हो गया नाश कुछ तो बोलिए
कि यूं ही हाथ पे हाथ धरे रहेंगे
और मरने वालों के दर्द को सीधे सिने पर सहेंगे
सतर्कता का चलाइए अभियान
सुरक्षित कीजिए भूमण्डल का प्रत्येक इंसान
धैर्य से लिजिए काम
नहीं तो इतिहास में दर्ज हो जायेगा आपका नाम
मेरे सरकार! सरकार की सुने
जो एकदम ज़रुरी हो उसे ही चुने
बेवजह न फैलाएं अफवाह
तभी करोना के दिल से निकलेगी आह
बन जाइए चौकीदार
न करने पाए करोना आपसे प्यार
मत दिजिए करोना को मोहब्बत का चांस
मंहगा पड़ जायेगा इसके साथ रोमांस
हाथ धुलें दिन में बार-बार रखना है याद
मुंह पर मास्क पहने यही है फरियाद
एक मीटर दूर से ही जोड़ लें हाथ
कहिए दूर से ही बनाए रखिए साथ
घर के बाहर नहीं चाहिए आपके पैर
वरना सोच लिजिए नहीं है आपके पीठ की खैर
करोना के पापा भी आ जायें
तो भी आप घर से बाहर नहीं आयें
करोना को भी याद रहे कि छट्ठी का दूध भी होता है
और आदमी कहीं ठान ले तो उसका बाल भी बांका नहीं होता है
करोना को भी आ जाये रोना
हाथ जोड़ के वो भी कहे ऐसा मत”करो ना”
जिस दिन निकलेगा करोना का फांस
उसी दिन पृथ्वी का प्राणी हवा में खुलकर लेगा सांस

पूर्णतः मौलिक स्वरचित सृजन की आग करोना के हृदय में
आदित्य कुमार भारती
टेंगनमाड़ा, बिलासपुर,छ.ग.

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