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करोना, तुम कुछ मत करो ना

एक दिन मेरे सपने में करोना आया
मैं देखा तो मुझे साक्षात् काल नजर आया
मैं करोना से बचकर वहां से भाग रहा था
मैं सोया था मगर सपने में जाग रहा था
पर इतने में करोना ने मुझे पकड़ा
और अपनी आगोश में जकड़ा
बोला कहां जा रहे हो श्रीमान
लगता है, नहीं दे रहे हो मेरी ओर ध्यान
मुझे करोना के नाम से दुनिया में जाना जाता है
सुना है तुम्हारा लेख बहुत आता है
बहुत लिखते हो लेखनी के लाल
मुझे देखकर पीले हो गये तुम्हारे गाल
कभी मेरे बारे में भी कुछ लिखा करो
जब जरूरत पड़े तो पटल पर दिखा करो
यहां सब तुम्हारे अपने हैं
और तुम्हारी क़ौम का नाश करना ही हमारे सपने हैं
क्षमा करें हे करुणा निधान
आप सूक्ष्म से भी सूक्ष्म कण में है विराजमान
हे जगत के भयंकरवादी आतंकी महराज
भला आप कहां है परिचय के मोहताज
हे करोना आप हैं वाइरस के सरताज
स्वयं पहने हुए सर पर काल का ताज
अगर बचा रहा तो लिख दूंगा आप पर आज
उसने मुझे क्रोध से देखा और बोला
फिर तुमने अब तक अपना मुंह क्यों नहीं खोला
मारे डर के डर रहे हो
बिना मारे ही मर रहे हो
मैंने कहा
आपकी प्रशंसा के लिए तो तैयारी बहुत बड़ी है
पर क्या करूं मेरे सामने तो मरने की पड़ी है
करोना ने बड़े ही गर्व से कहा
धरती का कोई भी मानव हमसे कहां बचा रहा
जिसको छू लेते हैं उनको पहुंचा देते हैं श्मसान
हमारी कृपा से मचा हुआ है हर ओर घमासान
हम हर जगह छा गये है गुरु
तुम लिखोगे या तुम्हरा उपचार करूं शुरू
मैं बोला हे महाराज क्षमा प्रदान करें
आप जीवन दें तो हम हाथ में कलम धरें
करोना ने अपनी बात खुलकर कही
हमने कहा ये है एकदम सही
आप बताइए मैं लिखता हूं
आजकल सड़कों पर कम दिखता हूं
अपने ही घर में कैद हूं
कहीं आप ना आ जाए इसलिए मुस्तैद हूं
मैंने पूछा आपका आना कैसे हुआ
वो बोले तुमने जानवरों के मांस को कैसे छुआ
तुम जानवर हो जो जानवरों का मांस खाते हो
हम नहीं आना चाहते हमें फिर भी बुलाते हो
तुम लोग इंसान की शक्ल में शैतान हो
और हम आ गए तो परेशान हो
हमारे जानवरों की परेशानी का कोई ठिकाना नहीं है
तुम्हारे स्वादिष्ट भोजन होने के अलावा दूसरा खाना नहीं है
अस्वच्छता की घटा चारो ओर छायी है
इसलिए ये आपदा आयी है
अगर करते रहोगे प्रकृति पर ऐसे ही अत्याचार
तो हम रोज़ लेंगे नये-नये अवतार
भूल जायेंगे कि मानव हो
यही समझेंगे कि दानव हो
कभी प्रकृति से प्यार भी किया करो
और इस प्रकृति को उपहार भी दिया करो
तुम्हें समझा कर जाता हूं
यदि नहीं माने तो नये अवतार में हंता बनकर आता हूं
मान जाओगे तो ठीक है
वरना तुम सब का नाश तो एकदम सटीक है
एक बार में सब साफ
फिर मत कहना कि नहीं किया माफ़
समझाना इन नादानों को
नहीं तो लाशें डालोगे खादानों को
अब करोना थोड़ा मुस्कुराया
तो मेरी जान में जान आया
बोला,सुनो जिस दिन जाग जायेगी इंसान की आत्मा
उस दिन खुद ब खुद हो जायेगा करोना का खात्मा
मेरे जाने का हो गया वक्त
कदम उठाना एकदम सख्त
समझ गया भगवान
नहीं पैदा करेंगे प्रकृति में व्यवधान
अब आप पृथ्वी से कीजिए प्रस्थान
कृपा रही आपकी तो बच जायेगी जान

पूर्णतः मौलिक स्वरचित सृजन की आग करोना के हृदय में
आदित्य कुमार भारती
टेंगनमाड़ा, बिलासपुर छ.ग.

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Dr. ADITYA BHARTI
Dr. ADITYA BHARTI
Tenganmada Bilaspur , Chhattisgarh
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आदित्य कुमार भारती मैं एक छोटे से गाँव(टेंगनमाड़ा)का रहने वाला युवक हूँ।मैं कोई कवि या...
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