कविता · Reading time: 1 minute

करोना की ढिठाई

लो आ गए हम दुबारा सावधान हो जाओ ,
मन चाहे या ना चाहें हमारा स्वागत करो ।

हमारे जुल्म ओ सितम सबके लिए समान,
हम नहीं करते कोई भेदभाव तारीफ करो।

तुम हमें वोट भी दोगे और हम जीतेंगे भी,
गलतियां करोगे तुम्हीं फिर भुगतान करो ।

हम तुम्हारी जिंदगी में दाखिल हो चुके ,
अब तुम चाहे आहें भरो या शिकवे करो ।

मर्जी है तुम्हारी जियो या बे मौत मरो तुम,
पाबंदी चाहिए या मुक्ति ,फैंसला तुम करो ।

तुम्हारी जरा सी चूक अस्पताल पहुंचाएगी ,
इसपर भी ना सुधरे तो मरने की तैयारी करो ।

हम तो सरकार हैं हमसे कहां तक उलझोगे,
हम तो युद्ध को तत्पर है तुम इशारा करो।

इधर तुमने गलती की उधर वायरस तैयार ,
विविध प्रकार के हैं ,तुम बस गिनती करो।

तुमने हमारे खिलाफ बनाए है प्रोटोकॉल ,
हम भी देखते है !,तुम इनका पालन करो ।

हमारी शक्ति का अंदाजा तुम्हें हो गया होगा ,
हमने विश्व को हिला दिया तुम बस देखा करो।

अरे!तुमने वक्सिन लगवा ली,बहुत अच्छा किया ,
मगर हम समूल नष्ट होंगे ,ऐसा भरोसा मत करो।

हम तुम्हारी जिंदगी से कभी नहीं जायेंगे ,समझे!
हर साल का अनुबंध है हमारा ,याद रखा करो ।

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