Dec 15, 2020 · कविता
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करोना का खौफ

सुनी जो उनके आने की आहट हमने ,

अपना होशो-ओ-हवास गंवाया हमने।

पहले सजग थे साफ सफाई को लेकर ,

अब नया वहम का रोग लगाया हमने।

अपनों के करीब आए ज़माना हो गया ,

दूर से ही सलाम को चलन बनाया हमने ।

अपने ही घर जबसे नज़रबंद हम हो गए ,

देखिये! खुद को ही कैदी बनाया हमने ।

अपना पालतू सर्दी-जुकाम भी दुश्मन लगे ,

कोरोना-ऐ-खौफ ज़हन में जबसे बसाया हमने।

अब तो ये आलम है हर शय वायरस ही दिखे ,

ऐसी दीवानगी में ये क्या हाल बनाया हमने !

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ओनिका सेतिया 'अनु '
ओनिका सेतिया 'अनु '
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नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर। विधा... View full profile
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