कविता · Reading time: 1 minute

छुअन

जब भी
तुम कभी
मुस्कुराते हुए
अपनापन जताते हुए
मेरे करीब तुम आते हो
तब-तब पराए सा लगते हो

जब कभी
शाम ढले
दीप जले
सकुचाते हुए
दूर जाते हुए
ओझल होते हुए
बुझी-बुझी सी तुम दिखते हो
दिल की गहराइयों को छू जाते हो

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