करवा चौथ पर विशेष

व्रत ये करवा चौथ का,पत्नी का पति प्रेम।
लम्बी वय पति की रहे,निर्जल करती नेम।।

सुख किरणों-सा भेंट कर,जीवन कर आबाद।
चाँद तुझे है मानती,तज बाबुल घर याद।।

सुख-दुख की बन संगिनी,करती प्रेम फुहार।
पतिव्रता जो बन रहे,देवी है वो नार।।

पति-पत्नी का प्रेम है,जग जीवन का सार।
तालमेल रखना सदा,घर-आँगन गुलज़ार।।

दिन ये करवा चौथ का,प्रतिदिन का उपहार।
रंग भरें जीवन खिले,दिल में हो जब प्यार।।

भौतिक चीज़ें भूल के,मन से मन उन्माद।
विश्वास रहो जोड़के,पति-पत्नी हों शाद।।

सीता तुमको चाहिए,खुद को करना राम।
ताली बजती दो हाथ से,नहीं एक का काम।।

–आर.एस.प्रीतम
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