करवाचौथ

जानती हूँ मैं,
जानती हूँ,मेरे भूखा रहने से नहीं बढ़ेगी तुम्हारी उम्र,
बरसों पढ़ी किताबों ने इतना तो सिखाया है,
पर तुम्हारी प्रीत मुझसे फिर भी यह करवाएगी,
जानती हूँ,मेरे भूखा रहने से तुम्हारी उम्र नहीं बढ़ पाएगी,
क्यों मैं अन्न जल त्यागूंगी,
बताना चाहती हूँ तुम्हें कि जीवन की प्राणवान चीज़े भी,
तुम्हारे आगे महत्वपूर्ण नहीं हैं,
मेरी भावनाएँ तुम्हें यह समझाएंगी,
जानती हूँ,मेरे भूखा रहने से तुम्हारी उम्र नहीं बढ़ पाएगी,
क्यों मैं सजूंगी संवरूंगी,
हमेशा तुम्हें सुंदर लगती ही हूँ ,
पर आज कुछ विशेष लगना चाहूंगी,
मेरी भावनाएँ तुम्हें यह समझाएंगी,
जानती हूँ,मेरे भूखा रहने से तुम्हारी उम्र नहीं बढ़ पाएगी,
कैसे आज इतनी भूख सह पाऊँगी,
हमेशा तुम्हारे साथ ही तो खाती हूँ,
आज तुम्हें खाता देख ही भर पाऊँगी
मेरी भावनाएँ तुम्हें यह समझाएंगी,
जानती हूँ, मेरे भूखा रहने से तुम्हारी उम्र नहीं बढ़ पायेगी,
क्यों निहारूंगी आज रात चाँद,
तुम्हारे साथ रात की चांदनी का आनंद उठा पाऊँगी,
बस यही सोच कर हरषाऊँगी,
मेरी भावनाएँ तुम्हें यह समझाएंगी
जानती हूँ,मेरे भूखा रहने से तुम्हारी उम्र नहीं बढ़ पायेगी,
क्यों जरुरी है, करवाचौथ रखना,
ना,ना,आज इन परम्पराओं पर,
कोई प्रश्न नहीं उठाऊँगी,
इन्हें बंधन मान कर नहीं,आत्मा से निभाऊंगी,
मेरी भावनाएं तुम्हें यह समझाएंगी,
जानती हूँ, मेरे भूखा रहने से तुम्हारी उम्र नहीं बढ़ पायेगी !!

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कवयित्री हूँ या नहीं, नहीं जानती पर लिखती हूँ जो मन में आता है !!...
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