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करवाचौथ (त्रिपदीय मुक्तक)

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

मुक्तक

October 8, 2017

“करवाचौथ” (त्रिपदीय मुक्तक)

“करवाचौथ”

सजन की प्रीत का त्योहार करवाचौथ आया है।
उतर कर आसमाँ से चाँद ने मुझको सजाया है।
पहन कंगन लगा बिंदी सजालूँ माँग में सपने-
बसा कर नैंन प्रीतम ने मुझे दर्पण दिखाया है।

बनाऊँ गुलगुले मीठे रखूँ फल साधना सुंदर।
सजाऊँ थाल में करवा धरूँ मन भावना सुंदर।
रहूँ निर्जल करूँ उपवास तेरी उम्र के खातिर-
बदल कर गौर से करवा करूँ शुभकामना सुंदर।

सुहागिन मैं सदा तेरी रहूँ माँ को मनाऊँगी।
निरख कर रूप छलनी से गगन चंदा निहारूँगी।
लिए वादा जनम फिर साथ का व्रत धारणा लेकर-
सजन के हाथ जल पीकर सफल जीवन बनाऊँगी।

डॉ. रजनी अग्रवाल”वाग्देवी रत्ना”
संपादिका-साहित्य धरोहर
महमूरगंज,वाराणसी(9839664017)

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Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more

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