.
Skip to content

करता है जो मुहब्बत बदनाम ही तो है

Pritam Rathaur

Pritam Rathaur

गज़ल/गीतिका

April 20, 2017

नज़रें हया से झुकना ये सलाम ही तो है
करता है जो मुहब्बत बदनाम ही तो है

क्यूँ जाएँ मैक़दे में पीने वास्ते
आँखों से रोज पीना इक जाम ही तो है

इस आगरे के ताज को इमारत न मानिए
दुनिया को इश्क़ का ये पैग़ाम ही तो है

जाओ न अपनी बाँहें ऐसे छुड़ा के तुम
कुछ और पल ठहर जा ये शाम ही तो है

है दर्द सहना इश्क़ में दिल का वो टूटना
दिल्लगी में दिलवर से ईनाम ही तो है

हम क़त्ल हो चुके सनम तेरी निगाह से
फिर भी लवों पे मेरे तेरा नाम ही तो है

लाजिम न तुमको कहना हूँ देखता तुम्हें
हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है

रूठो न हमसे तुम यूँ ही तेरे ख़याल में
दिन रात खोये रहना ये काम ही तो है

जो लोग दर्द झेलते ग़ैरों के वास्ते
दुनिया में आज़ “प्रीतम” गुमनाम ही तो हैं।।

Author
Pritam Rathaur
मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है... Read more
Recommended Posts
** मुहब्बत यूं बदनाम नहीं होती **
चाहत कभी गुमनाम नहीं होती राहे कभी सुनसान नहीं होती होती चाहत तेरे दिल में मेरी तो मुहब्बत यूं बदनाम नहीं होती ।। ?मधुप बैरागी... Read more
ग़ज़ल :-- मुहब्बत में कही बातें !!
ग़ज़ल :-- मुहब्बत में कही बातें !! मुहब्बत में कही बातें सुहानी कब नहीं होती ! तुम्हारे प्यार की दुनियाँ दीवानी अब नहीं होती !!... Read more
मुहब्बत किस कद्र बदनाम हुई
ना पूछो यारो मुहब्बत किस कद्र बदनाम हुई फ़ज़ीहत इसकी आजकल जमाने में आम हुई जिस्म के भूखे है जो दरिंदे वो प्रेम क्या जाने... Read more
मुहब्बत
मुहब्बत मुहब्बत ही जीत में जंग है मुहब्बत ही सबके संग है मुहब्बत से हो न सकूँ फना मुहब्बत बसी हर अंग है मुहब्बत में... Read more