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कभी भी चोट अपनों से ,यहाँ जब दिल ने’ खायी है

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गज़ल/गीतिका

October 13, 2016

कभी भी चोट अपनों से ,यहाँ जब दिल ने’ खायी है
न जाने पीर क्यों उसकी नज़र आँखों में’आयी है

छिपी रहती जो’ दिल में है वही बस बात है अपनी
निकलती जब लबों से ये तभी होती परायी है

नहीं परवाह अब हमको जमाने की रही देखो
नयी दुनियाँ तुम्हारे सँग सनम जबसे बसायी है

हमें मालूम है हमको बहुत तुम याद करते हो
हमें ये हिचकियों ने बात खुद आकर बतायी है

बरसते बारी बारी से यहाँ सुख दुख भरे बादल
समझ पर ‘अर्चना’ ये बात हमको आज आयी है
डॉ अर्चना गुप्ता

Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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