Nov 18, 2019 · कविता
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कभी कभी

मैं भूल जाऊँ तो तुम याद दिलाना
कभी-कभी..
चलते राह में कंकड पत्थर भी मिलेंगे
कभी-कभी..
यूँ जो दरिया है नदी के इस पार का उस पार का
ये क्या रोकेंगी हमें..
तुम फिर भी मिलने आओगे मुझसे मुझे पता है
कभी-कभी..
रिश्तों में कड़वाहट भी आएगी मगर शांत रहना
बुरा भी समय भी आएगा और अच्छा भी
कभी-कभी…
चलो नेकी पर ही चला जाय आत्मसमान के वास्ते
क्या जाता है..भले बुरे सभी मिलेंगे
कभी-कभी…
दुनिया का ये दस्तूर बडा असमंजस वाला है…
बस मुझे याद रखना और मुझे ही याद करना
कभी-कभी…
रुकने की तो सोचना ही मत तुम चलते रहना..
पैरों तलें पड़ेंगे छाले भी
कभी-कभी…
मुझे यकीन है कि मंज़िल पास ही कहीं होगी
वक्त भी नहीं मानता और मानते हम भी नही
कभी-कभी …
हरदिल से हर रिश्ते तुम निभाते रहना बस यूँही
मैं याद न कर सका तो तुम कर देना
कभी-कभी….

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✍️Brij
18Nov 2019

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Brijpal Rawat
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