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कभी-कभी

ईश्वर दयाल गोस्वामी

ईश्वर दयाल गोस्वामी

कविता

November 10, 2016

कभी-कभी
ढोना पड़ती है
पृथ्वी
अपने ही कंधों पर ।
अपने लिए नहीं,
समाज की
रक्षा के लिए ।
कभी-कभी
बाँधना पड़ता है
आकाश को भी
सीमाओं में ।
क्षितिज के
सौन्दर्य के लिए नहीं ।
आत्मरक्षा के लिए।
कभी-कभी
मापना पड़ती है,
समुद्र की गहराई भी,
आत्मावलोकन या
अहंकार प्रदर्शन
कके लिए नहीं,
बल्कि जीवन के
सौंदर्य की
प्रतिष्ठा के लिए ।
कभी-कभी
वह करना पड़ता है,
जो नहीं करना चाहिए
कभी-कभी ।
कभी-कभी
वह कहना पड़ता है
जो नहीं कहना चाहिए
कभी-कभी।
कभी-कभी
वह सुनना पड़ता है
जो नहीं सुनना चाहिए
कभी-कभी ।
और,यदि वह
न किया जाए
या न कहा जाए
या न सुना जाए , तो
आगे हम
कह ही नहीं सकते
कभी-कभी ।

Author
ईश्वर दयाल गोस्वामी
-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार... Read more
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