कभी अलविदा ना कहना

आप सब की नजर मेरी नई कविता…
“कभी अलविदा ना कहना”
मां की ममता,पिता के प्यार को
बहन के स्नेह,भैया के दुलार को
गुरू के आदर,अतिथि के सत्कार को
जीवन के मूल्य,आस के इंतजार को
कभी अलविदा ना कहना……..
वीरों की वीरता,तिरंगे की शान को
शहीदों की शहादत,भक्ति में ध्यान को
किताबों के ज्ञान,बडो़ के सम्मान को
तीर्थ पर दान,स्वयं की पहचान को
कभी अलविदा ना कहना……
खेतों की हरियाली,पंछी की चहक को
सावन की रिमझिम,फूलों की महक को
दिपावली के दीप,होली के रंग को
ईमानदारी की आदत,सच्चाई के संग को
कभी अलविदा ना कहना……
पढाई मे लगन, खेलों मे जोश को
सभा मे अमन,जवानी मे होश को
शादी मे गीत, समाज मे रीत को
भोजन मे शीत, एकांत मे मीत को
कभी अलविदा ना कहना…..
बागों मे बहार, गंगा-यमुना के देश को
गांधी जी के विचार,खादी के भेष को
मन्दिर मे पुजा,गुरूद्दारे मे पाठ को
चर्च मे प्रार्थना,मस्जिद मे नमाज को
कभी अलविदा ना कहना…..
©® बलकार सिंह हरियाणवी

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तमन्ना है मेरी कि मैं हर इक दिल तक पहुँच जाऊं, गमो को दूर कर...
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