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कभी अगर चाहो तो

Bikash Baruah

Bikash Baruah

कविता

October 23, 2017

कभी अगर चाहो तो
मेरे बारे में सोच लेना,
फुर्सत मिले तुम्हें काश
तस्वीर मेरा देख लेना ।
कभी अगर चाहो तो
गम हमसे बाँट लेना,
खुशी अगर नसीब हो तो
चंद हमारे झोली में डाल देना ।
कभी अगर चाहो तो
प्यार का इम्तिहान ले लेना,
मौत से भी डरता नहीं
चाहे आजमाकर देख लेना ।।

Author
Bikash Baruah
मैं एक अहिंदी भाषी हिंदी नवलेखक के रूप मे साहित्य साधना की कोशिश कर रहा हू और मेरी दो किताबें "प्रतिक्षा" और "किसके लिए यह कविता" प्रकाशित हो चुकी है ।
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