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कब आयेंगे अच्छे दिन

विधा:-गीत
कब आयेंगे अच्छे दिन,
कब होगा नया सवेरा। बागों में कोयल कूकेगी,
खगवृंदद करेंगे डेरा।
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पीपल की छॉवोंके नीचे,
काका ताज़ी सॉस भरेंगे।
नगरों के चौराहों पर-
कब तक ज़हरीले सांप डँसेंगे ।
काल चक्र के कुतिलिस्म का,
कब टूटेगा यह घेरा ।
कब आयेंगे अच्छे दिन-
कब होगा नया सवेरा।।
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कब निर्भय हो माँ बहनें-
स्वच्छंद विचर पायेंगी।
और बच्चियाँ घर से-
बेख़ौफ़ पढन जायेंगी।
कब भूखों की भूख मिटेगी, बदलेगा क़िस्मत का फेरा। कब आयेंगे अच्छे दिन- कब होगा नया सवेरा।।
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संविधान के हर विधान का
कब होगा सत्य निरूपण।
अपने ही कर्मों का प्रतिफल
कब पायेंगे खर-दूषण।
कुछ ऐसी विषम संगतों से
होगा राष्ट्र मुक्त ये मेरा।
कब आयेंगे अच्छे दिन
कब होगा नया सवेरा।

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विश्व गुरू फिर पुनः जगत में
भारत कब बन पायेगा।
और विश्व फिर भारत के गुण
उर्ध्व स्वरों में गायेगा।
मिट जायेगा सकल विश्व से
तम का यह घोर अंधेरा।
कब आयेंगे अच्छे दिन
कब होगा नया सवेरा।
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अटल मुरादाबादी

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साहित्यिक नाम-अटल मुरादाबादी विधि नाम-विनोद कुमार गुप्त शिक्षा-बी ई(सिविल इंजी०) एम०बी०ए०,एम०फिल(एच आर एम) सम्प्रति -सरकारी विभाग में सिविल इंजीनियर रुचि-हिन्दी साहित्य ,समाज सेवा व शिक्षा महामंत्री -दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन”सनेही…
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