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कपकपाते हैं हाथ मेरे..

Neeraj Chauhan

Neeraj Chauhan

कविता

November 18, 2016

कपकपाते हैं हाथ मेरे,
जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में
याद आते हैं वो जख़्म गहरे,
जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में

सूखने लगती हैं मेरी कलम की स्याही,
जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में
पूछने लगती हैं तुम्हारी माई,
जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में

तुम्हारी पत्नी रूठने लगती हैं,
जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में
किसी की मंगनी टूटने लगती हैं,
जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में

मैं शर्मिंदा होने लगता हूँ,
जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में
कुछ मासूमों पर रोने लगता हूँ,
जब लिखता हूँ तुम्हारे बारे में…

(वीर शहीदों को समर्पित)

– © नीरज चौहान

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Author
Neeraj Chauhan
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।

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