कन्या भ्रूण संरक्षण

कविता
क्यों बिटिया तुम्हें रास आती नहीं ?
क्यों ख़ुशियाँ तुम्हें यार भाती नहीं ?
है बिटिया घरों में चहकती बुलबुल,
क्यों बुलबुल तुम्हें यार भाती नहीं ?
है पुरुष का अहम बिटिया से बड़ा,
क्या बिटिया तभी लाड़ पाती नहीं ?
है होना पुरुष का नारी का करम,
न होता पुरुष अगर वो लाती नहीं।
पड़े रहते सभी घर शमशान बन,
दिलों जाँ से अगर वो सजाती नहीं।
,,,अवधूत,,,

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