कतरा कतरा जी रही है वो

गजल :- कतरा कतरा जी रही है वो-:

कतरा कतरा जी रही है वो
दर्द-ए-आंसू पी रही है वो

त्याग करके घर बनाती रही
उसी घर में घाव सी रही है वो

भावना के आंचल में पली थी कभी
आज खुद की कहानी कह रही है वो

प्यार ऐसा किया मां ने सबकुछ दिया
हर खुशी अपनी वारती रही है वो

टूटकर हर कदम पे खुद बिखरती रही
फिर भी बच्चों को अपने संवारती रही है वो

-सोनिका मिश्रा

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 147

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share