.
Skip to content

कठिनाइयाँ डरा रही है

लक्ष्मी सिंह

लक्ष्मी सिंह

गज़ल/गीतिका

November 9, 2017

?????
कठिनाइयाँ डरा रही है मत पिघला चट्टान को।
काँप उठा फिर गगन रोके ना कोई अरमान को।

रूकना ही नहीं, थकना ही नहीं, झुकना ही नहीं,
अभी और हवा देगे हम चाहतों की उड़ान को।

है जो वक्त बुरा और कातिल भी सामने तो क्या,
हौसला के दम पर उड़ेगें अगम्य आसमान को।

राहों में तो रोज ही मुश्किलें मिलती रही हमें,
हम तो कल भी थे आज भी खड़े हैं इम्तिहान को।

राह में ना रूकेगी कभी है लक्ष्य पर निगाहें,
आने ना दूँ कभी भी पैर या मन में थकान को।

ख्वाहिशें ये बुलंदियों की कभी भी छोड़ते नहीं,
जबकि जानते हैं सब ही यहाँ शिखर के ढलान को।

है तन्हा गुदड़ियों में अभी कलंदर – सी जिन्दगी,
अपनी मुट्ठी में कैद कर लूँ मगर इस जहान को।
?????-लक्ष्मी सिंह ?☺

Author
लक्ष्मी सिंह
MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is a available on major sites like Flipkart, Amazon,24by7 publishing site. Please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank... Read more
Recommended Posts
जुदाई तड़पा रही है
है सावन जुदाई भी तड़पा रही है, ये बारिश भी बिजली सी चमका रही है तेरे जब भी आते हैं आगोश में हम ये दिल... Read more
इन अश्कों से जाना ग़ज़ल हो रही है
इन अश्कों से जाना ग़ज़ल हो रही है पिला गम की हाला ग़ज़ल हो रही है ये तन्हाइयां साथ हैं अब हमारे न आवाज देना... Read more
जुल्‍म वाे ढहाती रही जुल्‍फ वो सुलझाती रही
जुल्‍म वो ढहाती रही जुल्‍फ वो सुलझाती रही , करके अ‍‍क्षि तीर से घायल वो इस कदर जाती रही, वो यु हमे तडपाती रही हमसे... Read more
ईश्वर की महिमा
जलमग्न धरा कई ओर हुई मानव पे संकट आय रही, इस बिपदा से कैसे हों विलग यह बात सबन को खाय रही। . तपती धरती... Read more