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कटुसत्य

Neeraj Chauhan

Neeraj Chauhan

कविता

July 6, 2017

चमक भी पैसा
दमक भी पैसा
आटा भी पैसा
नमक भी पैसा
नाम भी पैसा
काम भी पैसा
तीर्थ भी पैसा
धाम भी पैसा
रूप भी पैसा
रंग भी पैसा
चाल भी पैसा
ढंग भी पैसा
वार भी पैसा
त्यौहार भी पैसा
मार भी पैसा
प्यार भी पैसा
रिश्ता भी पैसा
नाता भी पैसा
पिता भी पैसा
माता भी पैसा
इज़्ज़त भी पैसा
साख भी पैसा
धुंआ भी पैसा
राख भी पैसा
इज़हार भी पैसा
इंकार भी पैसा
वहम भी पैसा
अहम् भी पैसा
खोट भी पैसा
चोट भी पैसा
खुलासा भी पैसा
ओट भी पैसा
बड़ा भी पैसा
छोटा भी पैसा
पतला भी पैसा
मोटा भी पैसा
शहर भी पैसा
गाँव भी पैसा
छांव भी पैसा
चाव भी पैसा
नंगा भी पैसा
दंगा भी पैसा
लूट भी पैसा
झूठ भी पैसा
लार भी पैसा
जार भी पैसा
मरहम पैसा
मार भी पैसा
जीर्ण भी पैसा
शक्त भी पैसा
भगवान भी पैसा
भक्त भी पैसा
सुख भी पैसा
दुःख भी पैसा
नीति भी पैसा
अनीति भी पैसा
बड़ाई भी पैसा
रुखाई भी पैसा
डिग्री भी पैसा
पढाई भी पैसा
सपना भी पैसा
‘अपना’ भी पैसा
जाति भी पैसा
धर्म भी पैसा
न्याय भी पैसा
कर्म भी पैसा
होली भी पैसा
दिवाली भी पैसा
रंग भी पैसा
रंगोली भी पैसा
ताज भी पैसा
तख़्त भी पैसा
नरम भी पैसा
सख़्त भी पैसा
कॉफ़ी भी पैसा
चाय भी पैसा
खाय भी पैसा
हाय भी पैसा !!!
— —- —- —- —- –?
संतोष नहीं तू पैसा…
सुख नींद नही तू पैसा…
तू निर्मम पापी पैसा
रे आपा धापी पैसा !!!
******* ****** ***** *****
– नीरज चौहान की कलम से..

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Author
Neeraj Chauhan
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।
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