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” कटी उम्र यों ही ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गीत

February 23, 2017

खेत, खलिहान ,
पगडंडियां संकरी !
घूँघट ,पनघट ,
हंसी रही सिकुरी !
मर्यादा ,पहरे ,
बातें अनकही !!

कलकल नदी ,
बनी जवनिया !
रेशम रिश्ते ,
मृदंग सा मनिया !
कटे किनारे ,
रहे बहते ही !!

अब ठहराव ,
लगे है आया !
परिवर्तन से ,
मन हरषाया !
आँखें संतोषी ,
प्यास अब सतही !!

Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more
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