घनाक्षरी · Reading time: 1 minute

कजरा लगाया तूने______(घनाक्षरी)

कजरा लगाया तूने, गजरा सजाया तूने ।
देख देख तुझको तो, दिल ललचाया है।।
माथे की यह बिंदिया, चुराए मेरी निंदिया।
रात रात भर तूने ,मुझको जगाया है।।
अधर अंगार भरे, श्रंगार गजब किया ।
जले जले हम जले, हमको जलाया है।।
सुन मेरे महबूब ,जतन किया है खूब।
हमको तो रब ने एक दूजे का बनाया है।।
राजेश व्यास अनुनय

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रग रग में मानवता बहती। हरदम मुझसे कहती रहती। दे जाऊं कुछ और ,जमाने तुझको, काव्य धारा मेरी ,ऐसी बहती ।। राजेश व्यास "अनुनय"
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