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** कचड़ा **

पं.संजीव शुक्ल सचिन

पं.संजीव शुक्ल सचिन

कविता

August 13, 2017

फेक कर कचड़े की थैली
सड़क बर्बाद करते हो
धरोहर राष्ट्र के हो तुम
नाम बदनाम करते हो।
कभी सरकार को कोसो
कभी मंत्री को दो गाली
चुनावी मौसम जब आता
पौवे की मांग करते हो।
तुम्हें न राष्ट्र की चिंता
चीता सम शक्ल है तेरा
अक्ल से अंधे दिखते हो
वक्त बर्बाद करते हो।
भला हो राष्ट्र का जिससे
कहाँ वो काम करते हो
भलाई जिससे हो तेरा
वहीं तुम मांग करते हो।
नमन है उन सहिदों को
हुये जो राष्ट्र पे कुर्बान
वहीं तुम कार्य उल्टे कर
उन्हें शर्मसार करते हो।।
©®पं.संजीव शुक्ल “सचिन”

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Author
पं.संजीव शुक्ल सचिन
मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक प्राईवेट सेक्टर में कार्यरत हूँ। लेखन कला मेरा जूनून है।

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