.
Skip to content

( कघुकथा ) जिंदगी का सफर

Geetesh Dubey

Geetesh Dubey

लघु कथा

April 6, 2017

आज सुबह से ही महेश बाबू किसी उधेड़बुन मे डूबे हुये थे…
एक डायरी पेन लेकर बरामदे मे रखी कुर्सी पर जा बैठे..

उम्र उनकी पचपन छप्पन के लगभग हो चली थी।परिवार के अन्य सदस्य कही बाहर गये हुये थे सो अकेलेपन मे महेश बाबू को कुछ लेखा जोखा करने का खयाल आ गया था।

डायरी जिसमे कि वे तमाम तरह के खर्चों का हिसाब किताब रखते थे, उसी मे कुछ सोच सोचकर वो लिखे जा रहे थे…

हो चुके खर्चों के अलावा भविष्य मे बच्चो की शादी, मकान बनवाने ऒर बुढा़पे के लिये बैंक बॆलेंस का होना आदि तरह तरह केआर्थिक नियोजन की चिंताओं के साथ उन्हे कुछ तनाव सा महसूस होने लगा तो सोचा चलो सामने वाली गली मे जाकर एक चाय पी जाये..

घर से निकले ही थे कि गली मे सामने से एक शवयात्रा चली आ रही थी, सो एक किनारे को खडे हो गये…

अंतिम यात्रा मे पीछे की ओर एक परिचित चेहरा नजर आने पर पूछ बैठे…
पता चला कि कोई तीस बत्तीस वर्ष का युवक था जो रात्रि मे अचानक ही हार्टफेल होने से चल बसा, अगले माह उसका विवाह होने वाला था…..

सुनकर महेश बाबू वापस घर को लॊट आये,डायरी पेन उठाकर रख दिये ऒर मुस्कुराते हुये उनके होठों से एक फिल्मी गीत सीटी के रूप मे निकलने लगा….

गीत कुछ यूं था ” जिंदगी एक सफर हॆ सुहाना,यहाँ कल क्या हो किसने जाना……..

गीतेश दुबे ✍?

Author
Geetesh Dubey
Recommended Posts
कुछ आर हुये हैं कुछ पार हुये हैं..........................
कुछ आर हुये हैं कुछ पार हुये हैं दुनियां में दुश्मन कुछ यार हुये हैं दौर-ए-आज में चुप ना बैठो हरगिज़ सहने पर ही अत्याचार... Read more
एक पुरानी डायरी मे, मुझको तेरा पता मिला.., कुछ पुरानी यादे मिली, कुछ पुराना वफ़ा मिला.., सब लिखा था डायरी मे, ज़ुल्फ़ से लेकर पाँव... Read more
पढ़ने की ललक हम भी लियें हुये!                राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर एक कविता बाल मन को प्रदर्शित करती हुई।
मन भोला भाला लिये हाथ में झोला लिये हुये मुट्ठी में अपने जँहा लिये आँखों में सपने सजाये हुये ख्वाबो को सच करने की चाहत... Read more
आओ बैठो तुम्हे सुनाये एक कहानी बाबू जी !
आओ बैठो तुम्हे सुनाये एक कहानी बाबू जी ! झरता है तो झर जाने दो आँख का पानी बाबू जी !! देख गरीबी सबने मुझको... Read more