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और धोखा मैं खा नहीं सकता

Pritam Rathaur

Pritam Rathaur

गज़ल/गीतिका

September 20, 2017

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मैं हँसी खुद नहीं करा सकता
जख़्म दिल का दिखा नहीं सकता

चोट किसने किसने दिया मुझे यारों
नाम उसका बता नहीं सकता

है ग़ुज़ारी ये उम्र गफ़लत में
और धोखा मैं खा नहीं सकता

गर्दिशों में रहे सितारा तो
भाग्य भी जगमगा नहीं सकता

राज़ जो दिल के दरमियां अपने
उससे पर्दा हटा नहीं सकता

अम्न की जो शमअ जलाई है
उसको हरग़िज़ बुझा नहीं सकता

बन गये ग़ैर वक्ते-मुफ़लिस में
अपनों को मैं भुला नहीं सकता

माँ के क़दमों को छोड़ कर “प्रीतम”
जा-ब- जा सिर झुका नहीं सकता

प्रीतम राठौर भिनगाई
श्रावस्ती (उ०प्र०)
१९/०९/२@१७
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Author
Pritam Rathaur
मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है... Read more
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