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और दिव्य सद्ज्ञान,प्राप्तिहित गुरु-गुण गह जन

बृजेश कुमार नायक

बृजेश कुमार नायक

कुण्डलिया

April 1, 2017

जन गह कर ज्ञ-उच्चता, बने नेह-सद्हर्ष |
देव-तुल्य सम्मान का, छू ले वह उत्कर्ष ||
छू ले वह उत्कर्ष ,बोधमय शुभ सूरज बन|
पकड़ सघन आनंद , मुस्कराए जग-भ्रम हन||
कह “नायक” कविराय, भावरूपी प्रेमी धन
और दिव्य सद्ज्ञान, प्राप्तिहित गुरु -गुण गह जन||

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

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Author
बृजेश कुमार नायक
कोंच,जिला-जालौन (उ प्र) के बृजेश कुमार नायक साहित्य की लगभग सभी विधाओं के रचनाकार हैं |08मई 1961को ग्राम-कैथेरी(जालौन,उ प्र)में जन्में रचनाकार बृजेश कुमार नायक की दो कृतियाँ "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" प्रकाशित हो चुकी है |पूर्व राज्य... Read more
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