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और तुम कहते हो कि तुम सुखी हो !

Neeraj Chauhan

Neeraj Chauhan

कविता

July 10, 2017

तुम केवल बाहर से हँसते हो,
दिखावटी..
अंदर से बेहद खोखले हो तुम,
घुटन, असंतुष्टि, पीड़ा, अपमान, अहम्, ईर्ष्या..
इन सबको कही गहरे में लपेटे हो तुम
और कहते हो कि तुम सुखी हो!

तुम्हारी रग रग का पसीना
हद से ज्यादा नमकीन है
क्योंकी इसमें तुम्हारे आंसू मिले हैं.

वही आंसू जिन्हें तुम सिर्फ अकेले में बहाते हो,
और दुनिया को कहते हो की
तुम सुखी हो,

तुम्हारा अकेलापन तुम्हे खाने को दौड़ता
है
हर हादसा तुम्हे पाने को दौड़ता
है
चक्रव्यूहों में फसे हो
एक के बाद एक ..
और कहते हो की तुम सुखी हो?

तुम्हारा बहिर्मन बार बार परास्त होता
है तुम्हारे अंतर्मन से
और तुम कहते हो की तुम सुखी हो?

– नीरज चौहान

Author
Neeraj Chauhan
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के प्रति मेरी गहरी निष्ठा हैं। जिसे आजीवन मैं निभाना चाहता हूँ।
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