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*. और क्या चाहिए *

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

गज़ल/गीतिका

April 4, 2017

महफूज़ दिल के सिवा और क्या चाहिए

दिया दर्देदिल के सिवा और क्या चाहिए

नजरें इश्क से सराबोर और क्या चाहिए

गुफ़्तगू नम- नजरों से और क्या चाहिए

इश्क तुमसे है बेशुमार और क्या चाहिए

मुझसे ना कर इज़हार और क्या चाहिए

ख़ामोश रह कर प्यार और क्या चाहिए

मुहब्बत कर-कर वफ़ा और क्या चाहिए

मरतें सिरत-सूरत-दफ़ा और क्या चाहिए

देखले अक्स अपना ऐसा आईना चाहिए

बेवफ़ा हैं बावफ़ा हैं ऐसा रहनुमा चाहिए

महके स्वांसे खुशबू का अहसास चाहिए

और क्या चाहिए अहसासे-जहां चाहिए

चलती है बादे-नसीम और क्या चाहिए

करले अपने दिल से वफ़ा पहले सनम

गर सनम मुझसा बेवफ़ा-बावफ़ा चाहिए

लोग कहतें हैं मुझको चोर -चितचोर

और क्या चाहिए सनम हमसा चाहिए ?

?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more
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