Apr 10, 2021 · कविता
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ओ मेरी ज़िंदगी

मैं तो दिनभर तुमको ही
बस याद करता हूं
आ जाओ तुम बाहों में
तुम्हें प्यार करता हूं

ओ मेरी जिंदगी तुम ही मेरी बंदगी।।

दिल में मेरे तुम ही हो
जिसे मैं प्यार करता हूं
तुम भी मुझको ही चाहो
बस फरियाद करता हूं

ओ मेरी जिंदगी तुम ही मेरी बंदगी।।

गर देखूं तुमको तो मैं
खुद को कैसे रोकूंगा
ले जाओ अब पास तेरे
ये दिल को बोलूंगा

ओ मेरी ज़िंदगी तुम ही मेरी बंदगी।।

अपना है तू प्यारा है तू
हर बार कहता हूं
हाथ तेरा थामने को
मैं बेताब रहता हूं

ओ मेरी ज़िन्दगी तुम ही मेरी बंदगी।।

मिलोगे मुझे है ये यकीं
इस आस में रहता हूं
दिल में मेरे जो भी है
वो बात मैं कहता हूं

ओ मेरी ज़िन्दगी तू ही मेरी बंदगी।।

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Surender Sharma
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