ओ कृष्णा

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ओ कृष्णा!
मौत की आखिरी क्षण तक
तू मुझे थामें रख।
मैं मिट जाना चाहती हूँ,
तेरे मुहब्बत के नाम पर।

ओ कृष्णा!
तू मुझे बाँसुरी बना ले,
अपने अधरों से लगा ले।

ओ कान्हा!
मेरे मन के तार
कुछ इस तरह से झनका दे,
मेरे हर दर्द को
तुम अपने गले लगा ले।

ओ कृष्णा!
मेरे मन की तड़प को,
अपने मन से सुन लो।
जो बात लब ना कह पाई,
उसे मेरी आँखों में पढ़ लो।

ओ कृष्णा!
मान-मर्यादा तज तेरी गोद में पड़ी हूँ मैं।
तेरी बाँसुरी की धुन पर बेसुध पड़ी हूँ मैं।
ओ मेरे कान्हा अब तुम ही सम्हालो मुझे,
तेरे ही चरणों में लिपटी पड़ी हूँ मैं।

ओ कृष्णा!
अब तुम ही बिगारे, तुम ही सँवारे,
जीवन की ये डोर किया तेरे हवाले।
???—लक्ष्मी सिंह ?☺

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