Aug 28, 2016 · गीत

ओ काली घटा (गीत)

ओ काली घटा मेरे आँगन आ
तू मेरी सहेली बन जा रे !

है सूखी धरती, प्यासी धरती
धरती सूख कर हो गयी परती
इस परती में रिमझिम-रिमझिम
प्यार के आँसू बरसा जा रे !

नदियाँ सूखी, प्यासे झरने
सूख रहे सब तृण-तृण हैं
झुलस रहीं खेतों में फसलें
पशु, जन, खग सब क्रंदन हैं

अपने मृदु वाणी से, हे सखि !
क्रंदन को गुंजन कर जा रे !!

सब बाल सखा मिल खेल रहे
हैं, काच-कचौटी कीचड़ में
सखियाँ कजरी गा रही हैं-
डगर-डगर घर आँगन में

इन मुरझाये सूखे होठों पर
खुशियों के गीत बिछा जा रे !

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जन्म -12 जुलाई 1972 को ग्राम व पो. जंगल चवँरी, थाना खोराबार, जिला-गोरखपुर (उ.प्र.) में...
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