“ओस”

छूना नहीं आकर मुझे ,
मैं भीगी रात की ओस हूँ ,
कतरा -कतरा बिखर जाऊँगी ,
हूँ नन्ही सी कोमल एहसास ,
सम्भाल कर रखना मुझे ,
टूट -टूट कर चूर हो जाऊँगी
दरिया की मुझको आस नहीं ,
सागर की नहीं है मुझको प्यास ,
फूलों का ऋंगार हूँ मैं ,
पंखुरियों का प्यार ,
झूम -झूम कर बयारों में ,
रूप बदल -बदल कर डोलती,
पतझर की मैं आस हूँ ,
हूँ जीवन का विश्वास||
…निधि …

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"हूँ सरल ,किंतु सरल नहीं जान लेना मुझको, हूँ एक धारा-अविरल,किंतु रोक लेना मुझको" View full profile
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