23.7k Members 49.9k Posts

ओस की बुन्दे

सितारों की है चमक
मोती सा है लगता
मोल नहीं कोई अनमोल है
सुंदर भेंट है कुदरत का,
कैसे बखान करूँ उसकी
जुगनू की तरह है लगता
कभी आकाश में रहते
कभी फूलों पर है गिरता,
पहले अक्सर दिखाई देते
अब कभी कभार नजर आते
तकनीकी युग में नजाने कंहा
खो गया प्यारी ओस की बुन्दे!

Like Comment 0
Views 8

You must be logged in to post comments.

LoginCreate Account

Loading comments
Bikash Baruah
Bikash Baruah
Guwahati, Assam
100 Posts · 2.2k Views
मैं एक अहिंदी भाषी हिंदी नवलेखक के रूप मे साहित्य साधना की कोशिश कर रहा...