ऐ ज़िंदगी तूने मुझे दिया क्या ?

दिल से चाहा वो मिला क्या ?
ऐ जिंदगी तूने मुझे दिया क्या ?

ना जब कोई पास था ।
पर मिलने का विश्वास था ।
हर पल देखा सपना भी ।
होगा कोई अपना भी ।
सब्र अनोखा था मेरा ।
किया भरोसा था तेरा ।
वही भरोसा तोड़ गया क्या ?
ऐ जिंदगी तूने मुझे दिया क्या ?

वो मिले मोहब्बत कर बैठे ।
भोली सूरत पर मर बैठे ।
सच हो गया था वो सपना ।
लगने लगा था वो अपना ।
जिंदगी यूँ खुशहाल हुई ।
यूँ बे-अदब सी चाल हुई ।
वो बे-अदबी छोड़ गया क्या ?
ऐ जिंदगी तूने मुझे दिया क्या ?

कुछ कसमें दी कुछ वादे हुए ।
संग जीने के इरादे हुए ।
जब प्यार बढ़ा तकरार बढ़ी ।
फिर मिलने की रफ़्तार बढ़ी ।
वो रात चांदनी की यादें ।
वो झरना वादी की बातें ।
इतनी जल्दी भूल गया क्या ?
ऐ जिंदगी तूने मुझे दिया क्या?

मोहब्बत कब मजबूरी बनीं ।
प्रेम कहानी यूँ अधूरी बनीं ।
कुछ बे वजह बहाने बने ।
कुछ अपने भी बेगाने बने ।
ये लहजा सब बता रहा था ।
‘सागर’अब दूर जा रहा था ।
कोई और मुझ सा मिल गया क्या?
ऐ जिंदगी तूने मुझे दिया क्या?

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