ऐ सनम...

तुम ही कह दो अब सनम……..
क्यों तुम्हे देख चेहरे पे मुस्कान सी झलकती है,
जैसे एक शम्मा की लॉ परवाने को तरसती है!
तेरी आँखों का नशा दिनरात बहकाता रहता है,
तेरा हुस्न तेरी अदा, नियत आजमाता रहता है !
कैसे कहु किस तरह तुम बिन जीता मरता हु,
तेरी एक हसीं के खातिर बे मौत तड़पता रहता हूँ,
तू कुछ भी समझें कुछ भी जाने,
तेरे इश्क़ मे हम हो गए दीवाने,
मेरा प्यार बस तेरे लिए, तू क्यों इतना मचलती है,
रफ़्तार मेरे लिए धड़कन की, तू क्यों हर बार बदलती है !
बेवजह ही मेरी बातो पर, तू क्यों यार बरसती है,
मैं खुद मे तुमको ढूंढता हूँ तो यॉर,
इसमें तुम्हारी ना कोई गलती है,,
इसलिए जाने -जा दिल की धड़कन, तेरे लिए तड़पती है… !!

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