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ऐ सनम हम को कभी ना आजमाना/मंदीप

ऐ सनम हम को कभी ना आजमाना/मंदीप

ऐ सनम हम को कभी ना आजमाना,
वरना दोबारा कभी लौट कर नही आयेगे,

दिखूं ना फिर दोबारा कभी तुझे ,
तेरे दो नयन जी भर आँसु बहायेंगे।

जहाँ से भी गुजरोगी जब भी तुम ,
साथ बिताये हुऐ पल मेरे तुम्हे बहुत सतायेंगे।

कोशिस मर्जी जितनी कर लेना तुम,
मुझे दिल से कभी नही निकाल पाओगे।

थाम ना सको अपने आप को कभी
मेरे जनाजे को तुम गले से लगाओगे।

मर कर भी “मंदीप” रहेगा जिन्दा,
हम तेरे आस पास हमेसा नजर आयेगे।

मंदीपसाई

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Mandeep Kumar
78 Posts · 4.2k Views
नाम-मंदीप कुमार जन्म-10/2/1993 रूचि-लिखने और पढ़ाने में रूचि है। sirmandeepkumarsingh@gmail.com Twitter-@sirmandeepkuma2 हर बार अच्छा लिखने... View full profile
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