Nov 1, 2018 · कविता
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ऐ माँ वो गुज़रा जमाना याद आता है

ऐ माँ वो गुज़रा जमाना याद आता है,
तेरी गोद में बैठकर आँसू बहाना याद आता है।।
वो बचपन के दिन, वो शरारतें, वो शैतानियां मेरी,
वो पड़ोसी के घर के सामान तोड़ना,
वो पड़ोसी की शिकायत और तेरा मेरे कान मड़ोड़ना,
वो तेरा मुझे पीटना फिर खुद रोना,
वो रोते – रोते मेरे आंसुओं को पोंछना याद आता है।
ऐ माँ वो गुज़रा जमाना याद आता है,
तेरी गोद में बैठकर आँसू बहाना याद आता है।।

मैं जानता हूँ कि सर पे मेरे सदा तेरा हाथ है,
कोई हो ना हो तू सदा मेरे साथ है,
जब अकेला होता हूँ, तो जी करता है तेरी याद में खो जाऊँ,
मैं फिर से बच्चा हो जाऊंँ और तेरी गोद में सो जाऊंँ,
वो तेरा मेरे सर को सहलाना और मुझे सुलाना याद आता है।
ऐ माँ वो गुज़रा जमाना याद आता है,
तेरी गोद में बैठकर आँसू बहाना याद आता है।।

शशिकान्त तिवारी ( बदनाम बनारसी)
वाराणसी

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बदनाम बनारसी
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अपने माता पिता के अरमानों की छवि हूँ मैं, अँधेरों को चीर कर आगे बढ़ने... View full profile
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