गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

ऐ नारी

तुझे फिक्र है दुनिया की
यह तेरी इंसानियत है
मगर
दुनिया की हैवानियत भी
समझ लेती तो अच्छा था
तेरे हर रूप ने
दुलार के बदले खाई हैं ठोकरें
वह भी समझ जाते दुत्कार का दर्द एकबार
जरा उनको भी ठुकरा देती तो अच्छा था
पीछे किसी ने किया नहीं
यह आने वाली इल्जाम ना लगाएं
उठ खड़ी हो पाने अपने अधिकार ए नारी
फिर पछतावा न होगा
अपनी नन्हीं परीयो के देखकर दुःख
कि
शैतानी बेड़िया तोड़ देती तो अच्छा था

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