कविता · Reading time: 1 minute

“ऐ जिन्दगी”…

जी लेंगे तुझे ऐ जिन्दगी।
फैसले जो तुमने किए हैं,
नहीं गिला शिकवा कोई।
ख़ुद की ख़ुद से बनती नहीं अभी,
पर तुम्हें हसरतों से निहार लेते हैं।
चाह रखते हैं तुझे फिर से पाने और जीने की,
इसलिए अब इतना क्या सोचना,
जी लेंगे तुझे ऐ जिन्दगी।

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PhD in Chemistry Worked as Prof at Engineering college
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