चीन का पाप कृत्य

आज के इस वैश्विक संकट में सभी देश चिंतित और भयभीत हैं और सब चीन को सन्देह की दृष्टि से देख रहे हैं । विभिन्न देशों का चीन के प्रति संदेहित होना अप्रत्याशित कतई नहीं कहा जा सकता । हिमगिरि के पार के इस देश को अनायास ही संदेहित नहीं किया गया है , इसके पार्श्व में सबके अपने तर्क हैं और इन्हें अनदेखा भी नहीं किया जा सकता । चीन में जब कोरोना वायरस प्रारंभिक अवस्था में था , चीन ने उसे छुपाया और जांच के नमूने को भी नष्ट किया । प्रकरण को सामने लाने वाले डॉक्टर और पत्रकार को चुप करवाया । जब दुनिया भर के देश इससे बुरी तरह जूझ रहे हैं , तब चीन के दूसरे प्रांत इससे अछूते कैसे रह गए । क्या यह चीन की पापमयी मंशा को इंगित नहीं करता । यह मानव से मानव में फैलता है , इस बात को प्रारंभ में छुपाया । WHO ने इसमें चीन का साथ क्यों दिया । क्या WHO और बीझिंग कोई व्यूह रचना कर रहे थे ।
वुहान से बिना किसी जांच के हजारों – हजार लोग विश्व के भिन्न-भिन्न देशों में कैसे चले गए । इटली ,स्पेन , जर्मनी ,फ्रांस
अमेरिका ,ब्रिटेन जब इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हैं ,तब
इसके केन्द्र रहे चीन को इससे मुक्ति की युक्ति कैसे सूझ गई ।
उसने दुनिया को इस विपत्ति से आगाह करके अपने उपाय को साझा क्यों नहीं किया । उसका यह कृत्य उसके पाप को ही उजागर करता है , तथा दुनिया के अन्यान्य राष्ट्रों में उसके प्रति संदेह को पुख़्ता करता है ।अब उसे दुनिया के देशों से अछूत होने का भय सता रहा है , इसलिए वह भारत के प्रयासों की सराहना कर उसका साथ चाहता है । लेकिन उसका यह पाप कृत्य सदैव अक्षम्य रहेगा ।

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