ऐसे मैं दिल बहलाता हूँ..

ऐसे मैं दिल बहलाता हूँ..
जीवन के उन्मादों को सहता जाता हूँ,
कभी -२ तो डरता और सहमता भी हूँ,
पर ऐसे मैं अपना दिल बहलाता हूँ।
कुछ कई पुरानी यादों से ,
कुछ कही पुरानी बातों से ,
मैं यों ही बातें कर जाता हूँ,
और ऐसे ही मैं अपना दिल बहलाता हूँ।
कभी खुशी में शामिल हो कर ,
कभी दुखों में शिरकत करके,
जीवन के सुख दुख को सह जाता हूँ ,
और ऐसे ही मैं दिल बहलाता हूँ।
कभी समय जब खाली पाता ,
युं ही कुछ मैं लिख जाता हूँ,
भावों से अपने मन को समझाता हूँ,
और ऐसे ही मैं दिल को बहलाता हूँ।
जब याद मुझे आती है तेरी ,
युं ही न सबकों दिखलाता हूँ,
एकांक में जाकर रो आता हूँ,
तस्वीर से तेरी मिल आता हूँ,
और ऐसे ही मैं दिल को बहलाता हूँ।
ऐसे ही मैं दिल को बहलाता हूँ।।

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