.
Skip to content

ऐसे मैं दिल बहलाता हूँ..

Ankit Kumar Dwivedi

Ankit Kumar Dwivedi

कविता

February 3, 2017

ऐसे मैं दिल बहलाता हूँ..
जीवन के उन्मादों को सहता जाता हूँ,
कभी -२ तो डरता और सहमता भी हूँ,
पर ऐसे मैं अपना दिल बहलाता हूँ।
कुछ कई पुरानी यादों से ,
कुछ कही पुरानी बातों से ,
मैं यों ही बातें कर जाता हूँ,
और ऐसे ही मैं अपना दिल बहलाता हूँ।
कभी खुशी में शामिल हो कर ,
कभी दुखों में शिरकत करके,
जीवन के सुख दुख को सह जाता हूँ ,
और ऐसे ही मैं दिल बहलाता हूँ।
कभी समय जब खाली पाता ,
युं ही कुछ मैं लिख जाता हूँ,
भावों से अपने मन को समझाता हूँ,
और ऐसे ही मैं दिल को बहलाता हूँ।
जब याद मुझे आती है तेरी ,
युं ही न सबकों दिखलाता हूँ,
एकांक में जाकर रो आता हूँ,
तस्वीर से तेरी मिल आता हूँ,
और ऐसे ही मैं दिल को बहलाता हूँ।
ऐसे ही मैं दिल को बहलाता हूँ।।

Author
Ankit Kumar Dwivedi
मेरा नाम अंकित कुमार द्विवेदी है। मैं अभी 19 वर्ष का हूँ और कंप्यूटर साइंस का छात्र हूँ। कविताओं में मेरी रुचि बहुत अधिक है और मै मुक्त छन्द की विधा में कविताओं का सृजन करता हूँ। सामाजिक विषयो पर... Read more
Recommended Posts
मैं जो हूँ वो हूँ जो नही हूँ वो होने का मुझसे दिखावा भी नही हो सकता कभी कभी अपनी इसी आदत के कारण मुश्किलो... Read more
मुक्तक
कभी कभी मैं खुद से पराया हो जाता हूँ! दर्द की दीवार का एक साया हो जाता हूँ! जब बेखुदी के दौर से घिर जाता... Read more
मैं शक्ति हूँ
" मैं शक्ति हूँ " """""""""""" मैं दुर्गा हूँ , मैं काली हूँ ! मैं ममता की रखवाली हूँ !! मैं पन्ना हूँ ! मैं... Read more
तेरी यादें
तेरी याद में कुछ इस कदर मैं खो जाता हूँ, कभी कभी तो मैं रोते रोते सो जाता हूँ। तू मिले ना मिले नहीं परवाह... Read more