” ऐसे न निहारो ” !!

समय से पहले ,
दस्तक मेरी !
आँखों में बस ,
छवि है तेरी !
यों अचरज से –
ना मुझे पुकारो !!

अविरल नेह की ,
धार बहे है !
रात दिवस भी ,
यही कहे है !
बन्धन मोह के –
जादू कर डारो !!

जागी महक है ,
रिश्तों में अब !
पल पल हुऐ ,
अचंभित वे सब !
चितवन बांधे –
है जग मतवारो !!

चहकने लगे हैं ,
कोने घर के !
छलकने लगे हैं ,
बोल अधर से !
दिल पर अविचल –
है राज तिहारो !!

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