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” ऐसी गई ठगी , कानों सुनी न – अधर धरी “

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गीत

February 3, 2017

एहसासों की चौखट पर ,
मन का नर्तन !
मधुर कल्पनाओं का नित ,
होता रहा सृजन !
पवन झरोखों की थपकी पर ,
खोई सुध री !!

सुधियों के दरवाजे पर ,
दस्तक दे दी !
उम्मीदें सब ऐसे ही ,
परवान चढ़ी !
छुअन जगाती रही रात भर ,
अनुभूति पसरी !!

चाहत की दरकार अभी ,
सच कायम है !
पलकों पर के ख़्वाब सभी ,
ताज़ा दम हैं !
बदले बदले से बस तुम हो ,
मैं चकित , ठहरी !!

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Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more

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