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ऐसा नहीं होता

Yatish kumar

Yatish kumar

कविता

October 27, 2017

ऐसा नहीं होता

हर रोज़ बस इतवार हो
ऐसा नहीं होता
भोली सूरत वाले सारे अय्यार हो
ऐसा नहीं होता
पत्थर पे फूल उगने के आसार हो
ऐसा नहीं होता
अपने दुश्मन ही पहरेदार हो
ऐसा नहीं होता
मैं मिलने जाऊँ और वो तैयार हो
ऐसा नहीं होता
मिलन का भूत उसपे भी सवार हो
ऐसा नहीं होता
मेरे इश्क़ में वो गिरफ़्तार हो
ऐसा नहीं होता
दिल उनका भी बेक़रार हो
ऐसा नहीं होता
मेरी तरह वो भी इश्क़ में बीमार हो
ऐसा नहीं होता
और मेरा महबूब मेरा यार हो
ऐसा नहीं होता
उसे फिर से मुझसे प्यार हो
ऐसा नहीं होता
पर हर बाज़ी में दिल की हार हो
ऐसा नहीं होता

यतीश २६/१०/२०१७

Author
Yatish kumar
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