ऐश्वर्या राय का कमरा...!

चला जाता हूँ/
उस सड़क पर
जहां लिखा होता है-
“आगे जाना मना है।”

मुझे
खुद के अंदर
घुटन होती है
मैं समझता हूँ
लूई पास्चर को,
जिसने बताया की
करोड़ों बैक्टिरिया हमें अंदर ही अंदर खाते हैं
पर वो लाभदायक निकलते है
इसलिए
वो मेरी घुटन के जिम्मेदार नही हैं

कुछ और है जो मुझे खाता है/चबा-चबा कर।
आपको भी खाता होगा कभी शायद
नींद में/जागते हुए/ या रोटी को तड़फते झुग्गी झोंपड़ियों के बच्चों को निहारती आपकी आँखों को
…धूप ,
नही आयगी उस दिन
दीवारें गिर चुकी होंगी या
काली हो जाएँगी/आपके बालों की तरह
आप उन पर गार्नियर या कोई महंगा शम्पू नही रगड़ पाओगे
आप की वो काली हुई दीवार
इंसान के अन्य ग्रह पर रहने के सपने को और भी ज्यादा/ आसान कर देगी।
अगर आपको भी है पैर हिलाने की आदत,
तो हो जाएं सावधान
‘सूरज’ कभी भी फट सकता है ; दो रुपये के पटाके की तरह
और चाँद हंसेगा उस पर
तब हम,
गुनगुनाएंगे हिमेश रेशमिया का कोई नया गाना।

तीन साल की उम्र तक
आपका बच्चा नहीं चल रहा होगा तो
…आप कुछ करने की बजाए कोसेंगे
बाइबिल और गीता को
तब तक आपका बैडरूम बदल चूका होगा
एक तहखाने में
और
आप कुछ नही कर पाओगे। आपकी तरह मेरा दिमाग
या
मेरा आलिंद-निलय का जोड़ा,
सैकड़ों वर्षों से कोशिश करता रहा है कि
जब
मृत्यु घटित होती है,
तो शरीर से कोई चीज बाहर जाती है या न्हीं?
आपके शरीर पर कोई नुकीला पदार्थ खरोंचेगा
..और अगर धर्म;
एक बार पदार्थ को पकड़ ले,
तो विज्ञान की फिर कोई भी जरूरत नहीं है।

मैं मानता हूँ कि हम सब बौने होते जा रहे है/कल तक हम सिकुड़ जायेंगे/तब दीवार पर लटकी आइंस्टीन की एक अंगुली हम पर हंसेगी।
और आप सोचते होंगे कि मैं कहाँ जाऊंगा?
मैं सपना लूंगा एक लंबा सा/उसमें कोई
“वास्को_डी गामा” फिर से/कलकत्ता क़ी छाती पर कदम रखेगा
और आवाज़ सुनकर मैं उठ खड़ा हो जाऊंगा एक भूखा बच्चा,
वियतनाम की खून से सनी
एक गली में /अपनी माँ को खोज लेता है/उस वक़्त
ऐश्वर्या राय अपने कमरे
(मंगल ग्रह वाला) में
सो रही है
और दुबई वाला उसका फ्लैट खाली पड़ा है
मेरे घर में चीनी खत्म हो गयी है
..मुझे उधार लानी होगी
..इसलिये बाक़ी कविता कभी नही लिख पाउँगा।

(हालांकि आपका सोचना गलत है)

-कत्ले आम।
(यह घोर चिंता की विषय है)

कवि बृजमोहन स्वामी “बैरागी”

Like Comment 0
Views 148

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share