ए दिल संभल संभल कर चल

ए दिल संभल संभल कर चल
ऊंचे नीचे जीवन पथ पर
कहीं न जाओ फिसल
ए दिल संभल संभल कर चल
आकर्षक हैं फूल जहां में
कांटो की भी कमी नहीं
सोच समझकर कदम बढ़ाना
कांटा जाए न चुभ
ए दिल संभल संभल कर चल
माना तेरी प्यास बहुत है
जीवन झंझावात युक्त है
मृग मरीचिकाओं में दुनिया की
कहीं न जाओ फंस
ए दिल संभल संभल कर चल
यह दुनिया का मेला है
आया हंस अकेला है
राहें भी आसान नहीं है
इस जग की गहरी दलदल में
कहीं न जाना धंस
ए दिल संभल संभल कर चल
ऊबड़-खाबड़ और पथरीले
कहीं सुगम कहीं रपटीले
पंचर न हो जीवन गाड़ी
देख परख कर चल
ए दिल संभल संभल कर चल

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