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ए काली रात

ए काली रात तुझे जुगनू बन अपनी कीमत बता देंगे
मुमकिन नहीं खतां होना हमसे ये हकीकत बता देंगे

तू जिंदा है हम जैसे दिलवालों की वजह से सुनले
खुद पीकर विष प्याला हम तुझको अमृत बता देंगे

तू क्यों सोचे कि हम तेरे रहमो कर्म पर जिंदा यहां
तू करती रहें सितम तो क्या हम इनायत बता देंगे

जा हो सके तो तू इंसाफ़ कर लेना जमाने भर मे
यह तेरी महफ़िल नहीं कि हम अदालत बता देंगे

हम जान लेते दरिया में फेंक पत्थर इश्क कितना
तू क्या समझे तेरी नफ़रत को , महब्बत बता देंगे

बिन तेरे हम जी नहीं सकते ये सोच सितम ना कर
ऐसा भी नहीं कि तेरे बहाने को कयामत बता देंगे

देख गुमराह ना कर ये सोच की वर्दीधारी हम यहां
मत रख अँधेरे में नज़र मिला कि इबादत बता देंगे

अशोक सपड़ा हमदर्द

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