मिलन के एहसास

एहसास

मिलन की खुमार, चड़े हुए नशे की सुमार
नशे की सूरत उतरे, पर न उतरे मिलन का एहसास

एतवार अभी बाकी, खूश्बु रह गई मेरे पास
यह मिलन के बाद का नशा है या सिर्फ एहसास

चमन में खिलते फूल और यों ही मुरझा जाते
झोंकें हवा के खूश्बु फैलाकर , देते हैं एहसास

कहे बहार आती और फिर चली भी जाती
मिलन की बहार, मन में बस जाता एहसास

तलवार की तेज़ धार सी नयन की चले कटार
अधरों की लाली, समाये लाल गुलाब का एहसास

नख से शिख तक करके प्रिय सोलह शृंगार
लाख कहो ना- ना, मन में जागे मिलन एहसास

मिल के जुदा हो गये खुद से, हुस्न से था प्यार
दिल ने कहा,अभी तो बाकी है मिलन का एहसास

बिज़ली सी कोंध जाती, अन्धेरी रात के सन्नाटे में
हुस्न का ज़लवा,ज्वालामुखी सा फुटता मन में एहसास

सजन

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