एहसास-ऐ-गैर

मुहब्बत के नाम का पाठ वो दिन रात रटता है।
जरा सा छेड़ दो तो ज्वालामुखी सा फटता है।।
क्या हालात हो गये आज दोस्ताना-ऐ-जहाँ के
जिसे मानो अपना एहसास-ऐ-गैर दिला के हटता है।।

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—::डी के निवातिया::—

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