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एहसानों के बोझ तले दबा एक जीवन ,

पहला एहसान माता पिता का ,
जिन्होंने जन्म दिया और पालन पोषण किया ।
और दुनिया का मुकाबला करने हेतु ,
हमें अपने पैरों पर खड़ा किया ।

दूसरा एहसान दोस्तों और रिश्तेदारों का ,
जिन्होंने मुश्किल के समय गिरगिटों की तरह ,
रंग बदलकर संसार की कड़वी सच्चाई स्वार्थपरता से ,
परिचय करवाया ।

तीसरा एहसान कुछ दुश्मनों का ,
जिन्होंने दिल और आत्मा को इतने जख्म दिए ,
के उन ज़ख्मों को संग लेकर हमें जीना सिखाया।

चौथा एहसान प्रकृति का ,
जिसने हमें मूक रहकर भी ,
दया ,करुणा,नेकी ,सहयोग ,संतोष ,और शांति का ,
पाठ हमें पढ़ाया।

और अब आखिरी एहसान मौत करेगी ,
एक थके हारे,टूटे हुए जर्जर हुए शरीर और जीवन को ,
खाक में मिलाकर ,और आत्मा को उसके ,
सच्चे प्रेमी परमात्मा से सदा सदा के लिए मिलवाया।

अच्छे और बुरे ,
अपनो और गैरों के,
एहसानो तले दबा यह जीवन ,
किस किस का एहसान , कैसे भला यह जीवन ,
उतरेगा।

यह सभी एहसान जो हमारा प्रारब्ध
बन गए है ।
भला कैसे इससे दामन छूटेगा इनसे !
अंतिम श्वास तक जिसने सदा साथ निभाया ।

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Author
नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर। विधा -- ग़ज़ल, कविता , लेख , शेर ,मुक्तक, लघु-कथा , कहानी इत्यादि . संप्रति- फेसबुक…
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